
जब वो निकलता है, घर से बाहर,
कहीं भी घूमने के लिए,
उसकी खुशी का कोई ठिकाना नही होता।।
गाँव बोलता है, वो सब जगह को,
चाहे पहाड़, नदी या हो झरना,
उसकी उमंग का कोई ठिकाना नही होता।।
बाइक पे बैठना, गाड़ी मे बैठना,
चाहे ठण्ड हो, गर्मी या हो बरसात,
उसकी शरारतो का की पैमाना नही होता।।
शैतानी करना, उछलना, कूदना,
चाहे की खुशी हो, या हो रोना,
उसकी मासूमियत का कोई नजराना नही होता।।
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