जब से मैंने जियांश के साथ घूमना शुरू किया है, तब से कुछ बातें या कहु हिदायेते बार बार सुनी है, जैसे की…

इतने छोटे बच्चे के साथ बाहर घूमने क्यों जाते हो, अभी बच्चे को बाहर का क्या ही समझ आता होगा, बच्चे की हेल्थ की कोई फिकर नही है तुम्हे, बच्चे को बाहर का खाना खिलाते हो, बाहर की हवा मे वो बीमार हो जायेगा, बच्चे को घुमाने का क्या फायदा जब उस कुछ भी याद रहने वाला नही है, बच्चे को ज्यादा अजनबी लोगो से क्यो मिलवाते हो, क्या घूमना इतना जरूरी है की बच्चे का बचपन ही छिन रहे हो???
पर क्या ये सही हिदायेते है? मैंने जितना जियांश के साथ ट्रैवल एक्सपेरिएंस किया है, उस अनुभव के आधार पे इन सवालों का जवाब कुछ इस तरह है…
घूमने जाने के लिए की उमर नही होती है, ऐसी बात नही है की बच्चो को बाहर का समझ नही आता है, हा उन्हे ये याद नही रहता है, की वो किस पहाड़, नदी या जंगल मे गए थे, पर उन्हे याद रहता है,

पहाड़ की चोटी पे अपने नन्हे कदमो से भागना,
पानी की लहरों मे खेलना,
हरी घास पे लोटना,
खाने की की नयी चीज देखकर उत्साहित होना,
नये लोगो को देखकर मुस्कराना,
नये लोगो से घुलना- मिलना,
गाड़ी से चलती हुई चीजो को देखकर अचरज करना।
हा ये सब उन्हे याद रहता है, इसलिए जब ब दुबारा घूमने का नाम सुनते ही वो ये सब याद करके खुश होते है। अब बात आती है हेल्थ की, क्या एक ही जगह, एक ही घर मे रखकर हम बच्चो को स्वस्थ रख सकते है, नही कभी भी नही, जब तक उन्हे वतावरंन् से परिचित नही कराएंगे, वो कैसे उस जान पाएंगे, कैसे उसमे ढल पाएंगे, बाहर जाने से बच्चे बीमार नही होते है, ये बात तो म अपने अनुभव से जान गयी हू। फिर बात आती है, बाहर के खाने की, तो घर मे भी सब, बाहर से ही तो आता है, बस उसका रूपांतरण करके घर का खाना बना लेते है अपने, तो शायद वैसे फ़ूड ओपशन की कोई कमी नही है, आराम से अपना पिकनिक बास्केट साथ लेकर जाओ और एंजॉय करो। अजनबी लोगो से बच्चे मिलेंगे तभी तो दोस्त बनाना सीखेंगे, और रही बात उनकी बचपन छिन जाने की, तो घर की चार्दिवारि मे कभी कोनसा बचपन खिला है।।
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